आसमाँ तक… एक चाहत, एक नीला आसमाँ। क्या हम सब इसे हर रोज़ नहीं देखते? क्या हम अपने अंदर उस एक आवाज़ को नहीं सुनते जो बार-बार पूछती है—”कब हम उस आसमाँ में उड़ेंगे?” हम लड़कियों की ज़िंदगी अक्सर एक बंद कमरे की खुली खिड़की से शुरू होती है। वही खिड़की हमें याद दिलाती हैContinue reading “बंद कमरे से खुले आसमान तक, एक उम्मीद की किरण”