“परंपरा – बेड़ियाँ या प्रगति ?”

चलिए आज हम कुछ ऐसा लेकर आए हैं, कि देखते है कितने लोग मेरे इन विचारों से सहमत हैं।ओर कितने लोग सहमत नही हैं। “परंपरा “ये शब्द तो हम सब अपने बचपन से ही सुनते आए हैं, कभी दादी तो कभी नानी या फिर अपने ही परिवार के अलग – अलग सदस्यों से। परंपरा जोContinue reading ““परंपरा – बेड़ियाँ या प्रगति ?””

मजबूरी से मजबूती तक

एक छोटी सी कली जिसके आंखों में भी सपने थे, जो उड़ना चाहती थी,पूरे बगीचे में महकना चाहती थी,पर उसके खिलने से पहले ही किसी ने उसे तोड़ दिया।अक्सर यही हजारों कलियों के साथ होता हैं,लेकिन किसी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसी बहुत सी कलियाँ होती हैं जो महकना चाहती है,परContinue reading “मजबूरी से मजबूती तक”

बंद कमरे से खुले आसमान तक, एक उम्मीद की किरण

​आसमाँ तक… एक चाहत, एक नीला आसमाँ। क्या हम सब इसे हर रोज़ नहीं देखते? क्या हम अपने अंदर उस एक आवाज़ को नहीं सुनते जो बार-बार पूछती है—”कब हम उस आसमाँ में उड़ेंगे?” ​हम लड़कियों की ज़िंदगी अक्सर एक बंद कमरे की खुली खिड़की से शुरू होती है। वही खिड़की हमें याद दिलाती हैContinue reading “बंद कमरे से खुले आसमान तक, एक उम्मीद की किरण”

“वह लड़की जो उड़ना चाहती थी”

🌸 हर दिन एक संघर्ष से जन्मी एक लड़की की कहानीवो बहुत कुछ कहना चाहती थी, बहुत कुछ जीना चाहती थी, लेकिन ज़िम्मेदारियों ने उसकी उम्र से पहले ही उसे बड़ा बना दिया। बचपन में जहाँ सपने होते हैं, वहाँ उसके हाथों में घर की ज़िम्मेदारी थमा दी गई। पहले घर, फिर रिश्तों, फिर एकContinue reading ““वह लड़की जो उड़ना चाहती थी””

एक यात्रा ऐसी भी

यात्राएं आखिर ये करना क्यों जरूरी होता हैं कभी किसी ने सोचा क्या ? अगर आप में से किसी ने कभी इस विषय पर विचार नहीं किया तो करना ,ओर पूछना अपने आप से क्यों हम कही अचानक से किसी यात्रा पर जाना चाहते हैं, या क्यों हम यात्रा करते हैं।शायद यहां कुछ लोग इसContinue reading “एक यात्रा ऐसी भी”

टूट कर फिर सम्भल कर उड़ने की अनकही कहानी

अनकही बाते आज इतनी घायल है चिड़िया की समझ में ही नहीं आ रहा कि क्या कहे क्या न कहे इतनी घायल वो भी मन से तन से तो तब भी एक बार घायल चिड़िया लड़ सकती है पर मन से घायल कैसे खुद को समझाए पता ही नहीं क्या कहे क्या न कहे खुदContinue reading “टूट कर फिर सम्भल कर उड़ने की अनकही कहानी”

Simaye

सीखने की कोई उम्र नहीं होती: जब जागो, तभी सवेराआज का सुविचार (Thought of the Day):”सीखने की कोई उम्र नहीं होती, जब भी मन करे कुछ नया सीखने का, तो सीख लेना चाहिए। क्योंकि जब तक हम सीख रहे हैं, तब तक ही हम ज़िंदा हैं, वरना एक ज़िंदा लाश के अलावा कुछ और नहीं।”उम्रContinue reading “Simaye”

Manshik azadi

समाज की बेड़ियाँ बनाम शिक्षा का विकल्प ​“समाज तुम्हारे लिए घूंघट, पायल और कंगन चुनेगा, लेकिन तुम्हें अपने लिए कलम और किताब चुननी है।” ​समाज अक्सर महिलाओं के लिए एक दायरा तय कर देता है, जहाँ उन्हें गहनों और रस्मों-रिवाजों में समेट दिया जाता है। लेकिन असली ताकत इन पारंपरिक बंधनों में नहीं, बल्कि शिक्षाContinue reading “Manshik azadi”

Ek nayi ummid ki kiran

kya apko kbhi esa lga hai ki sb khatm hai sare rashte bnd hai fir achanak se khi ek ummid jgi ho ki nhi abhi nhi ek rashta abhi bhi hai Agr apke shath esa huaa hai ya nhi ye to ap hi jante ho pr mere shath esa huaa jb lga ab sayad kuchContinue reading “Ek nayi ummid ki kiran”