मौन का शोर

“शोर “- अक्सर हम जब इस शब्द को सुनते हैं, तो हमारे मन में विचार ये आता है कि किसी से विवाद , भीड़ या चीख पुकार । पर क्या अपने कभी किसी मौन शोर को सुना है,ये वो शोर है जो हमें बाहरी आवाज या बाहरी दुनिया में सुनाई नहीं देता।

ये शोर हमारे अंदर ही अंदर एक तूफान में चलता रहता है। ये हमें सुनाई तब देता है जब चारों तरफ सन्नाटा हो। शायद इसी वजह से हम बाहरी शोर को तो सुन लेते है और उस पर ध्यान देते हैं, पर जो हमारे भीतर तूफान चल रहा है उस पर हम ध्यान नहीं देते , क्यों कि उसको सुनने के लिए हमें शांति चाहिए जो अक्सर इस भाग – दौड़ भरी जिन्दगी में हमें मिलती ही नहीं।

या यूँ कहें कि हम अपना ये शोर सुनना ही नहीं चाहते । क्यों कि ये शोर इतना खामोश होता हैं। जिसको कहने के लिए हमें शब्दों की जरूरत ही नहीं होती हैं, बल्कि ये शोर हमारी चुप्पी बन जाता है

अक्सर समाज ने हमें बताया जो शांत रहते हैं, या जो कम बोलना पसंद करते हैं,वो कायर होते हैं या वो हर चुके हैं।

असल में मौन होना या शांत होना कमजोरी नहीं होती है, और न ही कम बोलना ये हमारी आत्मसंयम और परिपक्वता , साथ ही सही समय पर सही शब्दों का चयन करने की रणनीति होती है। कई परिस्थितियों में हमारा शांत होना ही हमारे विद्रोह को दर्शाता है।

शांत होना ही हमारी सबसे बड़ी ताकत होती है,जो हमें इतना मजबूत बना देती है,कि हम अब किसी और के इशारों पर बात नहीं करते । न ही कोई बिना हमारी मर्जी के हमसे कोई प्रतिक्रिया ले सकता है।

ये शोर अक्सर हमें देर रातों को जागने पर सुनाई देता है,जब सारी दुनिया सो रही होती है तब कमरे में हमें एक खामोश शोर सुनाई देता है,जो हमारी ही आवाज होती है,वो आवाज जो शांत होने पर इतनी मजबूत हो जाती है ,जो दुनिया से लड़ने या समाज के सामने खड़े होने का साहस देती है।

और जब हम बोलना शुरू करते हैं,तो सब हमारी बातों में छिपे उस सन्नाटे को सुनते है,ओर यही हमारी असली ताकत बन जाती है।

मौन का अर्थ यह कतई नहीं है कि आपके पास कहने के लिए कुछ नहीं है; इसका अर्थ है कि आपने यह समझ लिया है कि हर बात हर किसी के समझने के लायक नहीं होती। अपने भीतर के इस शोर को बहने दें, इसे खुद में संजोएं। जैसा कि कहा गया है—’मौन वह भाषा है जिसमें सत्य की सबसे गहरी बातें कही जाती हैं।’ जिस दिन आप अपनी चुप्पी की शक्ति को पहचान लेंगी, उस दिन आपको बाहरी शोर की पुष्टि की आवश्यकता महसूस नहीं होगी। बस याद रखें, जो नदियाँ गहरे शोर के साथ बहती हैं, वे ऊपर से शांत ही दिखाई देती हैं।”

क्या आप मेरे इस विचार से सहमत हैं,क्या आप अपने भीतर चल रहे खामोश शोर के तूफान को सुन प रहे हैं,अगर हां तो परेशान न हो,बस यही समय आपको मजबूत बनाएगा ,यही तूफान आपको ताकत देगा ,इसके लिए खुद को तैयार कीजिए , और हमें भी अपनी राय दीजिए कि।

One thought on “मौन का शोर

  1. क्या आप सभी को मेरा आर्टिकल “मौन का शोर ” पसंद आया । इस पर आपके क्या विचार है हमें बताएं।

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